
भारत ने पाकिस्तान को सबक सिखाने वाले ऑपरेशन सिंदूर में जिस ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल का इस्तेमाल किया था, वो अब एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह है—इंडोनेशिया के साथ बड़ी डिफेंस डील!
भारत की “मेड इन इंडिया” पावर अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं, बल्कि विदेशी बाजारों में भी ‘Made in Bharat’ का ब्रांड वैल्यू गूंजा रही है।
इंडोनेशिया के साथ नई डील पक्की!
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत और इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस मिसाइल डील लगभग तय हो चुकी है। बस अब रूस की मंजूरी मिलनी बाकी है। एक बार रूस ने हरी झंडी दे दी, तो डील फाइनल मानी जाएगी।
जनवरी में हुई मीटिंग में CDS जनरल अनिल चौहान और इंडोनेशियाई रक्षा अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद यह करार तेज़ी से आगे बढ़ा।
फिलीपींस के बाद अब इंडोनेशिया की बारी
साल 2022 में भारत ने फिलीपींस के साथ 3500 करोड़ रुपये की ब्रह्मोस डील की थी। उस सौदे में भारत ने न केवल मिसाइलें दीं, बल्कि लॉन्चिंग सिस्टम और ट्रेनिंग सपोर्ट भी दिया था। अब इंडोनेशिया के जुड़ने से भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट गेम और मज़बूत होगा।
‘ब्रह्मोस’ — दो नदियों का संगम, दो देशों की ताकत
इस मिसाइल का नाम भारत की ब्रह्मपुत्रा और रूस की मॉस्को नदी से लिया गया है। DRDO और रूस की साझेदारी में बनी यह मिसाइल पानी, हवा और जमीन — तीनों जगह से छोड़ी जा सकती है। इसकी रफ्तार इतनी तेज़ है कि ये आवाज़ से तीन गुना तेज़ (Mach 3) उड़ान भर सकती है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ में पाकिस्तान को मिला था सबक
भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में जब पाकिस्तान को करारा जवाब दिया था, तब ब्रह्मोस ने अपनी सटीकता और ताकत से सबको हैरान कर दिया था।
पाकिस्तानी एयरबेस पर हुई सर्जिकल स्ट्राइक जैसी इस कार्रवाई ने दुनिया को बता दिया था कि भारत अब जवाब नहीं, वार करता है।
अब दुनिया बोलेगी — ब्रह्मोस ही है असली “गेम चेंजर”
इंडोनेशिया डील के बाद भारत के पास डिफेंस एक्सपोर्ट के नए दरवाजे खुलेंगे। कई और देश — वियतनाम, मलेशिया, और सऊदी अरब — पहले ही अपनी दिलचस्पी दिखा चुके हैं। कहा जा सकता है कि ब्रह्मोस अब केवल “मिसाइल” नहीं, बल्कि “ब्रांड इंडिया की उड़ान” बन चुकी है।
पाकिस्तान शायद अब गूगल पर सर्च कर रहा होगा — “BrahMos से बचने का उपाय क्या है?” और भारत शांत भाव से कह रहा है — “हम रक्षा करते हैं, धमकी नहीं देते।”
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